Saturday 21 March 2009

चंदन है इस देश कि माटी...........................

आज बहुत दिनों बाद शाखा में गया और आज ही जो गीत गाया, वह मेरा प्रिय गीत है.

जब भी इस गीत को गाता हूँ या फिर सुनता हूँ, गीत के भाव एवं शब्द सोचने के लिए विवश कर देते हैं, विशेष कर
"जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है"

गीत गंगा नामक वेबसाइट है, जहाँ पर संघ के गीत आप सुन सकते हैं एवं पढ़ सकते हैं, आभार सहित वहीँ से लिया है .

गीत को सुने और आनंद लें.


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चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु ||

हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है
जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है
जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है || 1 ||

जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है
ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है || 2 ||

जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है
जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है
जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है || 3 ||


The soil of this country (Bhaarat) is like ‘chandan’, each village a ‘land of penance’.
Each girl is an image of a Devi while each boy is ‘Ram’.

Each body is like a sacred mandir, every person benevolent,
where lions became toys (the story of the little prince Bharat, who out of curiosity dared to open the jaw of a lion to count the teeth) and a cow is worshipped as a beloved mother.
Here, dawn blows the ‘shankh’ every morning and dusk sings lullaby every evening.

Where one’s fortune is shaped through one’s actions, dedication to work is one’s sacred duty, Where the poets sing the saga of sacrifice and penance.
The knowledge and wisdom of this land is like the water of Ganga - pure and perennial.


Whose soldiers chant the holy Bhagavad Geeta in the battlefield,
Where, in a field, Seeta was found playing under a plough,
Where the goal of human life is nothing less than God-realisation.

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